पीड़ित परिवार के नार्को टेस्ट को रुकवाने हाई कोर्ट पहुंचा राहुल गांधी का ‘खास आदमी’

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी के युवराज राहुल गांधी का ‘खास आदमी’ और पत्रकारिता जगत में मौजूद कई वफादारों में से एक साकेत गोखले ने हाथरस मामले में पीड़ित परिवार सहित सभी आरोपियों और पुलिस कर्मियों के नार्को/पॉलीग्राफ़ टेस्ट पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस याचिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नार्कों टेस्ट से कांग्रेस पार्टी क्यों घबरा रही है। जबकि इससे मामले की जांच न सिर्फ आसान हो जाएगी, बल्कि पक्षपात का कोई आरोप भी नहीं लगेगा।

राहुल गांधी के करीबी गोखले के मुताबिक नार्को टेस्ट एक तरह से पीड़ित परिवार के साथ जबरदस्ती करना है। इसका मकसद कोर्ट के समक्ष गवाही के वक्त उन्हें भयभीत करना है। ताकि परिवारवालों को न्यायालय के सामने गवाही के समय भयभीत किया जा सके। गोखले ने अपनी याचिका में कहा कि यह “जबरदस्ती” न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। दायर याचिका में कहा गया है, “पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट प्राकृतिक न्याय के सभी सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि उन पर कोई आरोप नहीं है। पीड़ित परिवार के साथ ऐसा करना एक तरह की जोर-जबरदस्ती है।”

 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई की तारीख 12 अक्टूबर तय की है। माना जा रहा है कि इस दिन गवाही के लिए पीड़ित परिवार अदालत में पेश हो सकता है। इससे पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले में निष्पक्ष और गहन जाँच को सुनिश्चित करने के लिए बीते शुक्रवार को हाथरस मामले की प्रारंभिक जांच के बाद एसपी, डीएसपी और थानेदार सहित कई पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। साथ ही मामले में शिकायतकर्ता, आरोपियों और इससे जुड़े पुलिसकर्मियों के टेस्ट का ऑर्डर दिया था। सीएम योगी ने कल ही ट्वीट कर कहा था कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को किसी भी प्रकार की नुकसान पहुँचाने की सोच रखने वालों को किसी तरह बख्शा नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब गोखले ने इस तरह की याचिका कोर्ट में दायर की है। इससे पहले भी गोखले ने राम मंदिर भूमिपूजन को रोकने के लिए कोर्ट का रुख लिया था। राहुल गांधी की टीम के अनौपचारिक सदस्य साकेत गोखले की ओर से दाखिल PIL में कहा गया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कोरोना के अनलॉक-2 गाइड लाइन का उल्लंघन है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि याचिका केवल आशंकाओं पर आधारित है, इसमें तथ्य नहीं हैं।

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