खतरे में है प्रशांत भूषण की वकालत, सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के हैं दोषी

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दोषी प्रशांत भूषण की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हाल ही में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) को उनके ट्वीट्स की जाँच करने और बार के नियमों के अनुसार उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा, “परिषद का मानना है कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत बार काउंसिल में निहित वैधानिक कर्तव्यों, शक्तियों एवं कार्यों के आलोक में तथा खासकर अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24ए एवं धारा 35 तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के अध्याय दो, खंड- छह के दायरे में वकील प्रशांत भूषण और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो फैसला दिया, उसका व्यापक अध्ययन और जाँच जरूरी है।”

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आगे कहा कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को ट्वीट की जाँच करनी चाहिए और नियमों के तहत आगे बढ़ना चाहिए। बैठक की अध्यक्षता वाईस प्रेसिडेंट सतीश ए. देशमुख के द्वारा की गई थी।

आपको बता दें कि अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24ए के तहत यदि कोई वकील नैतिक भ्रष्टता से जुड़े किसी अपराध में दोषी पाया जाता है, तो वह कानूनी प्रैक्टिस नहीं कर सकता या किसी राज्य की बार काउंसिल के रोल पर नहीं रह सकता है। अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24 में कहा गया है कि पेशेवर कदाचार के दोषी पाए गए वकील को अदालतों में प्रैक्टिस करने से निलंबित किया जा सकता है या उनके लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया जा सकता है।

वहीं प्रशांत भूषण के लिए अधियनियम के पैराग्राफ 89 की मिसाल रखी गई है जिसके मुताबिक, ”एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) अगर चाहे तो संबंधित वकील के लाइसेंस के नामांकन को निलंबित कर सकती है।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को भूषण को अवमानना का दोषी करार देते हुए सिर्फ 1 रुपए का जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि जुर्माना अदा नहीं करने पर भूषण को तीन महीने की कैद भुगतनी होगी और वे 3 साल तक प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।

भूषण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना का मामला चलाया था। भूषण के दो ट्वीट्स पर आपत्ती थी जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और CJI बोबडे के खिलाफ टिप्पणियां की थीं। मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद भूषण सर्वोच्च अदालत के 1 रुपए जुर्माने की सजा को स्वीकार किया था।

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