ममता बनर्जी का पर्दाफाश, बीजेपी नेता की हत्या में टीएमसी नेता गिरफ्तार

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में किस हद तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिहादी तत्वों के हाथों में सत्ता सौंप दी है, इसका ताजा उदाहरण बीजेपी नेता मनीष शुक्ला की हत्या है। मनीष शुक्ला की हत्या पर बीजेपी कोहराम न मचाती तो शायद इस हत्या की साजिश का पर्दाफाश न हो पाता। लेकिन बीजेपी के स्थानीय नेताओं की एकजुटता और प्रदेश पार्टी के आक्रामक रुख के बाद राजयपाल के दखल से दबाव में आई ममता सरकार की सीआईडी ने दो आरोपियों को अब पकड़ किया है।

शुरुआती जानकारी में पता चला है कि मुख्य आरोपी टीएमसी का नेता है और बंगाल जामा मस्जिद का अध्यक्ष है। यही नहीं वो रेलवे मर्चेंट्स एसोसिएशन का भी अध्यक्ष है। खास बात ये है कि ये संघठन टीएमसी से जुड़ा हुआ है। वहीं मुख्य आरोपी खुर्रम के सम्बन्धियों ने स्थानीय बंगाली मीडिया को बताया है कि यो टीएमसी का नेता है और वे भी टीएमसी से जुड़े हुए हैं।

इससे पहले, बंगाल सीआईडी ने सोमवार को मनीष शुक्ला की निर्मम हत्या के लिए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। सीआइडी ने मामले में मोहम्मद खुर्रम और गुलाब शेख नाम के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। खुर्रम को दिन में ही गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि शेख को 5 अक्टूबर को देर रात दबोचा गया था।

सीआईडी पूरे मामले को आपसी रंजिश करार देकर बीजेपी नेताओं की हत्या की सिलसिलेवार घटनाओं को छिपाना चाहती है। सीआईडी अधिकारियों ने दोनों से पूछताछ की और दावा किया कि मोहम्मद खुर्रम की मृतक बीजेपी नेता के साथ ‘व्यक्तिगत दुश्मनी’ थी।

वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया और सीबीआई जांच की मांग की है। विजयवर्गीय का कहना था कि पुलिस स्टेशन के सामने मनीष की हत्या की गई है, जो ये साबित करता है कि बंगाल पुलिस बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या में शामिल है।

बीजेपी की तरफ से इस मुद्दे पर असहमति का एक सबसे बड़ा कारण पिछले कुछ समय में वहाँ पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की अप्राकृतिक मृत्यु हुई है, जिसे राज्य की पुलिस ने आत्महत्या घोषित कर दिया या उस पर कोई नतीजा नहीं निकला। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए बीजेपी ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है।

गौरतलब है कि मनीष शुक्ला की हत्या बीते रविवार शाम करीब 8:30 बजे उस वक्त हुई थी जब वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यालय गए थे। सीसीटीवी फुटेज में साबित होता है कि बाइक सवार हमलावरों ने शुक्ला को बेहद करीब से गोली मारी थी।

वहीं गिरफ्तार दोनों आरोपितों ने मनीष शुक्ला की हत्या किस मकसद से की थी, CID इसकी जाँच कर रही है। इसके साथ ही जाँच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन दोनों ने इस हत्या के वारदात को अंजाम कैसे दिया। CID ने कहा है कि मामले की जाँच उन्हें अन्य आरोपितों तक ले जाएगी।

गौरतलब है कि बीजेपी नेता मनीष शुक्ला की हत्या का आरोप बीजेपी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया है। मामले में तूल पकड़ते देख पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जाँच सीआईडी को सौंप दी थी। बीजेपी ने सीआईडी जांच पर रोष जताया है। पार्टी संगठन का कहना है कि उन्हें तृणमूल सरकार के अंतर्गत काम करने वाली पुलिस पर भरोसा नहीं है। बीजेपी आरोप लगाती आई है कि ममता सरकार न सिर्फ जिहादी तत्वों को संरक्षण दे रही है बल्कि हिन्दू समुदाय को इन तत्वों द्वारा प्रताड़ित भी कर रही है। ऐसे में मनीष की हत्या के पीछे इन तत्वों का हाथ होने के पूरे पूरे आसार हैं।

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