हाथरस कांड में गहरी साजिश- आरोपियों के पत्र और भीम आर्मी की मौजूदगी ने उलझाई गुत्थी

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली: हाथरस कांड में दिन ब दिन नए खुलासे और तत्थों के सामने आने से मामले की गुत्थी और उलझती जा रही है। मामले में राजनीतिक गिद्धों के उतरने के बाद पैदा हुई मुश्किलें कम नहीं हुई थीं कि अब सामने आए नए तथ्यों ने मामले की संदिग्धता को और बढ़ा दिया है। जेल में बंद मुख्य आरोपी के पत्र ने जहां मामले को ऑनर किलिंग का ठहराने की कोशिश की है, तो वहीं पीड़ित परिवार के साथ भीम आर्मी के तीन लोगों की शुरुआत से मौजूदगी ने भी कई गंभीर सवाल पैदा कर दिए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसाईटी के गठन के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट मॉनीटर्ड सीबीआई जांच की मांग की है, लेकिन पीड़ित परिवार लगातार सीबीआई जांच न करवाने की मांग कर रहा है। इससे मामले की संगिद्धता बढ़ी है और पीड़ित परिवार पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन अब मामले के आरोपियों की चिठ्ठी सामने आने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।

हाथरस कांड के मुख्य आरोपियों ने हाथरस के पुलिस अधिक्षक को एक पत्र लिख कर उल्टे मृतका के भाई और मां पर ही उसे मारने का आरोप लगाया है। मुख्य आरोपी संदीप की ओर से दावा किया गया है कि उसकी पीड़िता से अक्सर फोन पर बातचीत होती थी।

संदीप ने पत्र में लिखा है कि, “हम लोगों की मुलाकात के साथ कभी-कभी फोन पर बात भी होती थी। हमारी दोस्ती उसके घरवालों को पसंद नहीं थी। घटना के दिन मेरी उससे खेतों पर मुलाकात हुई उसके साथ उसकी माँ और भाई थे। उसके कहने पर मैं तुरंत घर चला गया और वहाँ अपने पिता के साथ पशुओं को पानी पिलाने लगा”।

संदीप ने पत्र में आगो लिका है कि, “बाद में मुझे गाँव वालों से पता चला कि हमारी दोस्ती को लेकर उसके माँ और उसके भाई ने उसके साथ मार-पीट की। जिससे उसे गंभीर चोट आई थी और बाद में उसकी मौत हो गई। मैंने कभी भी उसके साथ गलत काम नहीं किया ना ही उसे मारा। लड़की के परिवार वालों ने झूठे आरोपों में हम चार लोगों को जेल भिजवा दिया। हम सभी लोग निर्दोष हैं।”

ग़ौरतलब है कि, संदीप और मृतका के परिवार के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्‍स (CDR) में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि दोनों नंबरों के बीच 100 से अधिक बार बातचीत हुई थी। हालाँकि, मृतका का परिवार कॉल रिकॉर्ड की बात को भी झूठ बता रहा है। इस पत्र में संदीप ने दावा किया कि पीड़िता उसके गाँव की लड़की थी, जिससे उसकी दोस्ती थी।

वहीं, दूसरी तरफ स्थानीय मीडिया ने खुलासा किया है कि विवादित संगठन भीम आर्मी और उसके प्रमुख चंद्रशेखर हाथरस के पीड़ित परिवार पर दबाव डाल रहे थे। परिवार पर नजर रखने और मीडिया में बयान देने के लिए भीम आर्मी के तीन लोग पीड़िता के घर उनके रिश्तेदार बनकर रहे थे। लेकिन पुलिस को शक होते ही ये लोग एक-एक कर गायब होने लगे। इनमें एक युवती भी थी।

हालाँकि, परिवार ने किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के लोगों की उपस्थिती से इनकार किया है, लेकिन परिवार का कहना है कि उनके समाज के ही कुछ लोग उनके साथ रहने आए थे। विनीत जायसवाल, एसपी हाथरस, का कहना है कि भीम आर्मी के लोग जब पीड़िता से मिलने आए थे, तो एक युवती को वहीं छोड़ गए थे, यह जानकारी खुफिया सूत्रों से मिली थी। पुलिस के अनुसार, वह युवती बार-बार मीडिया के सामने परिवार को डराने और धमकाने की बात करती आ रही थी।

पुलिस ने जब इन बाहरी लोगों से उनकी निजी जानकारी माँगने की कोशिश की तो युवती ने कुछ नहीं कहा और इसके बाद वह परिवार के साथ नजर नहीं आई। खास बात ये है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया था और कहा था कि उसके पास खूफा रिपोर्ट्स हैं जिसके तहत मामले को जातिय संघर्ष का रंग देकर दंगा भड़काने की कोशिशें हो रही थीं।

हाथरस पीड़ित की 29 सितंबर की सुबह मौत के बाद भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल पहुँच गया था और उन्होंने अपने सैकड़ों उपद्रवी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इस घटना पर जमकर उत्पात मचाया। प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक ने भी कहा कि पोस्टमॉर्टम हाउस में लड़की के शव को भीम आर्मी के चंद्रशेखर और कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने भीड़ इकट्ठा कर घेर लिया था और लगभग दस घंटे तक रोके रखा। रास्ते में भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने शव छीनने का भी प्रयास किया था।

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