दिल्ली दंगों की जांच से घबराया जिहादी वामपंथी माफिया, नेरेटिव बदलने की साजिश

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली : दिल्ली दंगों की जांच कर रही पुलिस जैसे जैसे मुख्य साजिशकर्ताओं के करीब पहुंच रही है, राजधानी के वामपंथी और जिहादी तंत्र में खलबली मच गई है। आलम ये है कि अब ये माफिया दिल्ली पुलिस की जांच को पक्षपातपूर्ण बताकर उसकी विश्वशनियता को खारिज करने की नई साजिश रचने में जुट गई है। इसके लिए बकायदा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को विशिष्ट नागरिकों के नाम से पत्र भेजने की तैयारी है।

केजरीवाल को पत्र लिखने वालों में हमेशा की तरह सीपीएम नेता बृंदा करात, सोनिया गांधी के करीबी हर्ष मंदर, वजाहत हबीबुल्लाह, आनंद पटवर्धन, शबनम हाशमी और प्रकाश राज जैसे वामपंथियों के नाम हैं।

दिल्ली में हुए दंगे शुद्ध रुप से हिन्दू विरोधी दंगे थे। अबतक की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यमुनापार इलाके में हुए इन खूनी दंगों को बेहद सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया था। जहां हिन्दु इलाकों की पहचान के बाद उन्हें निशाना बनाकर दंगों के क्रियान्यवयन तक के लिए लोगों को जिम्मेदारी बांटी गई थी। आम आदमी पार्टी के काउंसिलर ताहिर हुसैन हो या जामिया की छात्रा सफूरा जरगर या फिर जाफराबाद की गुलफिशा ही क्यों ना हो, इन सभी को जोड़ने वाली एक ही कड़ी है। वो है वामपंथी गिरोह, जो दंगों को फैलाने के लिए लोगों को दिशानिर्देश दे रहा था।

दिल्ली दंगों की जांच में पुलिस के हाथ गुलफिशा के रूप में डीयू के घोषित वामपंथी प्रोफेसर अपूर्वानंद के शामिल होने का सबूत हाथ लगा है। गुलफिशा उर्फ गुल ने पुलिस को दिए बयान में बताया है, कि प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा था कि हिंसा लिए तैयार रहो। दंगों में हिंसा के बाद अपूर्वानंद ने गुलफिशा की तारीफ करते हुए कहा था कि वो पकड़े जाने पर उनका और वामपंथी संगठन पिंजड़ा तोड़ की सदस्यों का नाम न लें।

ऐसे में वामपंथी संगठनों के साथ साथ कई ऐसे नाम भी दंगों की साजिश में सामने आ सकते हैं जिससे इनके हिंदू-विरोधी चरित्र और हिन्दु समाज के खिलाफ अभियानों का खुलासा हो सकता है। इसलिए अब ये पुलिस की जाँच को प्रभावित करने के लिए इसे अन्यायपूर्ण, पक्षपातपूर्ण और बनावटी जैसी संज्ञा दे रहे हैं।

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