चीन से आया नया ईसा मसीह, पूर्वोत्तर भारत में चर्च घबराया

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली : ऐसा नहीं है कि चीन की तरफ से सिर्फ एलएसी पर ही संकट पैदा हुआ है, बल्कि चीन का एक कट्टर ईसाई संगठन भी भारत में संकट पैदा करने का माद्दा रखता है। नगालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (NBCC) ने पूर्वोत्तर भारत में चर्च से जुड़े अपने अधिकरियों को पत्र के जरिए एक चेतावनी जारी की है। काउंसिल ने कहा है कि राज्य में एक चीनी पंथ अपनी जड़ें तेजी से फैला रहा है।

“द चर्च ऑफ अलमाइटी गॉड” (सर्वशक्तिमान ईश्वर का चर्च) चीन का एक कुख्यात पंथ है जो दावा करता है कि ईसा मसीह धरती पर एक चीनी महिला के रूप में वापस आ गया है। चीन के इस पंथ पर हिंसा फैलाने और सोशल मीडिया का सहारा लेकर झठ-फरेब से प्रचार करने का आरोप लगता रहा है।

एनबीसीसी के महासचिव ज़ेलो कीहो के मुताबिक “द चर्च ऑफ अलमाइटी गॉड” पूर्वोत्तर भारत में शोसल मीडिया साइट्स जैसे फेसबुक के जरिए “द चर्च ऑफ अलमाइटी गॉड” और पूर्वी प्रकाश नाम से संगठित और आक्रामक ढंग से प्रचार कर रहा है। जिसकी वजह से कई ईसाई मतावलंबी इनके झांसे में आ रहे हैं।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में लगभग 5.5 मिलियन से अधिक ईसाई रह रहे हैं। अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में भी बड़ी संख्या में ईसाई रहते हैं। ज़ेलो कीहो के मुताबिक, ऐसे हिंसक पंथ ईसाईयों के लिए खतरा हैं जो उनसे असहमत हैं।

इस पंथ से जुड़ी जो जानकारी मिल सकी है उसके मुताबिक यह पंथ चीन में 1990 में एक चर्च समूह के रूप में शुरु हुआ। लेकिन धीरे धीरे इस चर्च समूह ने एक अलग पंथ की पहचान हासिल कर ली। इस पंथ की स्थापना करने वाले झाओ वीशान का दावा है कि ईसा मसीह ने यांग जियांगबिन नाम की एक चीनी महिला के रूप में पुनर्जन्म लिया है और उसे लाइटनिंग डेंग का नाम दिया गया। लेकिन इस पंथ का इतिहास हिंसा से भरा हुआ है। चीन में हत्या, अपहरण जैसे 100 से ज्यादा मामलों में इस ईसाई पंथ का नाम जुड़ा रहा है। आम लोगों की सुरक्षा के लिए खतराक बताकर चीन की कम्यूनिस्ट सरकार ने इस ईसाई पंथ को प्रतिबंधित किया हुआ है।

बताया जा रहा है कि फिलहाल ये ईसाई पंथ अमेरिका से संचालित होता है, लेकिन भारत सहित 35 से अधिक देशों में इसकी शाखाएं हैं। इसके संस्थापकों झाओ वीशान और यांग जियांगबिन ने अमेरिका में राजनीतिक शरण ली हुई है और वे नियमित रूप से वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिल्में, धार्मिक सामग्री और ऑडियो व्याख्यान पोस्ट कर अपना अभियान चलाते हैं।

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