सियासी दिवालियापन में गांधी परिवार झूठ, फरेब और मक्कारी का सहारा ले रहा है

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी और उसके मालिकों का सियासी दिवालियापन इस हद तक हो गया है कि, वो हाथरस की मृतक किशोरी की लाश पर अवसरवाद की बेशर्म रोटी सेंकने से भी नहीं चूक रहे हैं। आलम ये है कि दशकों तक गांधी परिवार की चौखट पर रोटी के टुकड़ों पर जो ऐजेंडाधारी पत्रकार पले हैं, वो भी वैज्ञानिक तथ्यों को नज़रअंदाज़ करते हुए गांधी परिवार की जिद को सही करार देने में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस पार्टी के युवराज और उनकी सामंती बहन प्रियंका वाडरा हाथरस की किशोरी की दुखद मौत के पीछे के कारणों और वैज्ञानिक सबूतों को भी नकार रहे हैं। वे लगातार इस मामले में गैंगरेप की बात कह रहे हैं, जबकि डॉक्टरों की रिपोर्ट साबित करती है कि किशोरी के साथ बलात्कार नहीं हुआ था, बल्कि ये शुद्ध रूप से रंजिशन हत्या का मामला है। गांधी परिवार के चाटूकार पत्रकार और बीबीसी के लिए लिखने वाले माधवन नारायन्न ने लिखा कि हाथरस की दलित किशोरी की मौत गांधी परिवार के लिए किसी वरदान से कम नही है।

कांग्रेस पार्टी और झूठ पर आधारित आंदोलनों की लंबी फ़ेहरिस्त है। हाल में ही देख लीजिए कैसे कांग्रेस तत्थों को तोड़ मरोड़कर लोगों को भड़काने की कोशिश करती है। सोशल मीडिया युग में जब सूचना क्रांति अपने चरम पर है कांग्रेस 19वीं सदी की अफ़वाह फैलाने की तकनीकों का इस्तेमाल करती है, लेकिन बार बार वो खुद एक्सपोज़ हो रही है।

पिछले साल सीएए कानून पर झूठ फैलाकर गांधी खानदान ने देश के अल्पसंख्यकों को भड़काया और देश में गृह युद्ध की स्थिती पैदा करने की कोशिशें की, जब इससे उन्हें सफलता नहीं मिली तो फिर कृषि सुधारों पर किसानो को भड़काना शुरु किया, लेकिन जब किसानों ने ही कांग्रेस पार्टी की इस साजिश को नकार दिया, तब हाथरस की मृतका पर सियासी माइलेज लेने के लिए गांधी परिवार बुधवार को यमुना एक्सप्रेस-वे पर उतर आया।

हाथरस की मृतक किशोरी के परिवार से मिलने की बात कह कर राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका वाडरा के साथ दिल्ली से निकले थे, लेकिन नोएडा पहुंचते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटा कर गांधी परिवार ने साबित कर दिया था कि उनक मकसद पीड़ित परिवार से मिलना नहीं बल्कि सियासी ड्रामा करना है। हुआ भी कुछ यूं, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं की वजह से कानून-व्यवस्था का खतरा पैदा हुआ तो यूपी पुलिस ने राहुल गाँधी के काफिले को उत्तर बॉर्डर पर ही रोक दिया गया। इस दैरान जब पुलिस ने राहुल गाँधी को रोकने का प्रयास किया तो राहुल गाँधी जमीन पर गिर गए। हालाँकि, राहुल गाँधी का यह वीडियो देखते वक्त यह प्रतीत हो रहा है कि वह सुरक्षित जगह देखने के बाद घास के ऊपर खुद ही गिर गए थे। साफ था कि राहुल के मन में हाथरस की मृतका नहीं बल्कि अपनी ईमेज बिल्डिंग का विचार चल रहा था।

ऐसा ही ड्रामा राहुल की बहन प्रियंका वाडरा भी करती आई हैं। पिछले साल दिसम्बर 2019 में ही नागरिकता कानून को लेकर चल रही ड्रामेबाजी के दौरान प्रियंका ने झूठा आरोप लगाते हुए कहा था कि एक महिला अधिकारी ने उनका गला दबाया और धक्का देकर गिरा दिया। प्रियंका से कथित बदसलूकी को लेकर कॉंग्रेस ने एक वीडियो भी जारी किया था लेकिन दिलचस्प बात यह थी कि इस वीडियो में प्रियंका के साथ कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं दिखाई पड़ी।

2014 के बाद से लगातार कांग्रेस पार्टी और गांधी खानदान की मक्कार सियासत एक्सपोज़ होती आ रही है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान देश के अलग अलग राज्यों में जातिवाद का जहर घोलकर कृत्रिम मामले पैदा किए गए। इनमें सबसे कुख्यात हरियाणा का जाट आरक्षण का आँदोलन था, इस हिंसा को भड़काने में कांग्रेस के नेता और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके करीबियों का नाम आया था, इसी तरह गुजरात में हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकोर के सहारे तीन जाति आधारित आरक्षण के आंदोलन खड़े करने में कांग्रेस महासचिव अहमद पटेल और खुद राहुल गांधी की संलिपत्ता के प्रमाण मिले थे।

जाहिर है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास और प्रगति के एजेंडे का तोड़ ढूंढ नहीं पा रही है, लिहाजा ऐतिहासिक जाति आधारित फूट का इस्तेमाल कर जनता को भड़का कर सियासी मुकाम हासिल करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश को सशक्त बनाने की मुहिम पर जनता का ध्यान ना जाए इसलिए कांग्रेस झूठ और फरेब का भी सहारा लेने से नहीं चूक रही है। ये स्वस्थ लोकतंत्र के लिए न सिर्फ गलत है बल्कि देश के भविष्य के लिए भी घातक है।

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