IAS से नेता बने शाह फैसल ने साबित कर दिया कितना फर्जी हैं अलगाववादी सिद्धांत

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली : धारा 370 के हटने के बाद पिछले डेढ़ साल में कश्मीरी राजनीति की पुरातन परतों के नीचे का दबा सच सामने आ गया है। कश्मीर में राजनीति सिर्फ स्पेशल स्टेटस की एवज में केंद्र से मिलने वाली अरबों रुपयों को गोल करनी तक सिमित रही है। यही वजह है कि दशकों से कश्मीर में अलगाववाद एक उद्योग बनकर उभरा जिसने युवाओँ को तो अंधकार में धकेला ही लेकिन साथ ही राज्य की जनता को एक भ्रष्ट तंत्र के मकड़जाल में बांधे रखा।

पिछले सत्तर साल से जम्मू-कश्मीर में चुनिंदा परिवार केंद्र से मिलने वाली अरबों रुपयों की बंदरबांट में लगे रहे जबकि जम्मू और लद्दाख को विकास से दूर रखा गया। यही वजह है कि धारा 370 हटने के बाद पहली बार स्थानीय चुनावों में राज्य की प्रमुख राजनीतिक दलों जैसे पीडीपी और नेश्नल कॉन्फ्रेंस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। यही नहीं ये दोनों दल अब तक मुख्यधारा की राजनीति में वापसी की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर स्टडी सर्कल के संयोजक आशुतोष भटनागर के मुताबिक धारा 370 के तहत राज्य को मिले संवैधानिक रियायतें एक तरह से कश्मीरी आम जनता के ही हाथों में बेड़ियों की तरह थीं। आज जब धारा 370 नहीं है और लद्दाख को अलग केंद्र शाषित राज्य बना दिया है कि तो कश्मीर में विकास की राजनीति शुरु हो गई है। भटनागर के मुताबिक ढेड़ साल में कश्मीरी जनता खुद को सशक्त और खुदमुख्तार समझने लगी है। यही वजह है कि जो नेता कश्मीर में गृह युद्ध की बातें करते थे अब वहीं आम कश्मीरी की शांति से घबरा कर सियासी मैदान में कूदने से बच रहे हैं।

भटनागर के मुताबिक पीडीपी और नेश्नल कॉन्फ्रेंस ने अलगावावादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के साथ अनोपचारिक समझौता कर रखा था। जिसके तहत केंद्र सरकार की मदद को आपस में बांटा जाता था और आम जनता के लिए इसमें हिस्सेदारी नहीं रहती थी। भटनागर के मुताबिक राज्य के पूरे सरकारी तंत्र में इन्ही दलों और संगठनों के लोग नौकरियां कर रहे थे। जो सरकारी तनख्वा तो पाते थे लेकिन जुबान अलगाववाद की बोलते थे।

भटनागर के मुताबिक 2009 के आईएएस अफसर शाह फैजल इस तंत्र को समझ गए थे और उन्होंने सरकार से इस्तीफा देकर राजनीति में जाने की बात कह कर अपनी मंशा भी साफ कर दी थी। भटनागर के मुताबिक शाह फैजल नर्म अलगाववाद की राजनीति को नए सिरे से नेतृत्व देने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन बदली हुई परिस्थियों में अब वे हताश हो चुके हैं।

2019 की शुरुआत में शाह फैजल ने नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद मार्च 2019 में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) का गठन किया। जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद भी उनके साथ थीं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ करने वाले फैजल को बीते साल 14 अगस्त को दिल्ली एयरपोर्ट पर नहीं रोका गया होता तो वे नीदरलैंड के हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज कराकर कश्मीर मुद्दे को हमेशा के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक समस्या बनाकर रख देते।

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