स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के हाथों बेइज्जत हुआ चीन, जानिए क्या है एसएफएफ

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली : पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना की ताजा कार्रवाई से तिलमिलाया चीन दुनिया में बुरी तरह से बेइज्जत हुआ है। चीन को ये हार पच नहीं रही है और उसके मुखपत्र भारत को गंभीर परिणाम झेलने की धमकियां तक दे रहे हैं। आपको बता दें कि पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की जमीन हड़पने की कोशिश को भारतीय सेना ने न सिर्फ नाकाम किया है, बल्कि रेजांग ला दर्रे के आगे रेकिन दर्रा और हुनान कोस्ट को 57 साल के बाद वापस अपने कब्जे में ले कर चीन को कड़ा संदेश भी दिया है।

बताया जा रहा है कि भारतीय सेना की विशेष खूफिया स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) की एक कंपनी ने ये कारनामा अंजाम दिया है। एसएसएफ भारतीय सेना का अंग नहीं है, लेकिन इस खूफिया फोर्स को भारतीय सेना के अधिकारी कमान देते हैं, जबकि इसमें शामिल सैनिक मूल रूप से तिब्बती होते हैं। इस फोर्स का गठन 1962 के भारत-चीन युद्ध के फौरन बाद आर्टिलेरी के एक अधिकारी सुजान सिंह उबान ने किया था। इसे तब इस्टाबलिशमेंट-22 के नाम से जाना जाता था।

अब इस फोर्स को स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के नाम से जाना जाता है और इस फोर्स में अब तिब्बती मूल के साथ साथ गोरखा जवान भी भर्ती किए जाते हैं। खास बात ये है कि इस फोर्स की कमान रक्षा मंत्रालय के तहत नहीं आती है, बल्कि ये फोर्स सीधे कैबिनेट सचिवालय (रॉ) के आदेशों पर काम करती है। इस फोर्स का नेतृत्व एक इंस्पेक्टर जनरल पद का अधिकारी करता है, जोकि सेना के मेजर जनरल रैंक का ही एक सेना अधिकारी होता है। एसएफएफ में शामिल इकाइयां विकास बटालियन के रूप में जानी जाती हैं। पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह ने भी अपने करियर में एक वक्त इस फोर्स का नेतृत्व किया था।

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) औपचारिक रूप से भारतीय सेना का हिस्सा तो नहीं है, लेकिन सेना के नियंत्रण में ही काम करती हैं। इस फोर्स की ट्रेनिंग स्पेशल फोर्सेस की तरह ही होती है और ये कई तरह के अभियानों को अंजाम दे सकती है। हालांकि इस फोर्स को गठित करते वक्त इसके लक्ष्य और उद्देश्य अलग थे, लेकिन बावजूद इसके इस फोर्स ने समय समय पर अलग अलग ऑपरेशन में हिस्सा लिया है। इस फोर्स में महिला सैनिक भी शामिल होती हैं जो कई तरह के गुप्त ऑपरेशन में हिस्सा लेती हैं। सूत्रों के मुताबिक स्पेशल फ्रंटियर फोर्स ने कई सीक्रेट अभियानों में हिस्सा लिया है। यही नहीं एसएफएफ ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, करगिल युद्ध और कई आतंक विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया है।

चीन के खिलाफ युद्ध और तिब्बत में कार्रवाई के लिए स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) के पास विशेष प्रशिक्षण हासिल है। ये फोर्स शुद्ध रूप से पहाड़ी और कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों में होने वाले युद्ध के लिए प्रशिक्षित है। इस फोर्स को दुनिया भर में कहीं भी गुप्त ऑपरेशन के लिए भेजा जाता है। साथ ही इनके हथियारों की खरीद को लेकर भी इसे स्वायतता हासिल है। ये फोर्स अपने अभियानों के लिए दुनिया में कहीं से भी हथियार और साजो-सामान खरीदने के लिए स्वतंत्र है। जानकार इस फोर्स को चीन के खिलाफ भारत का ट्रंप कार्ड मानते हैं।

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