यूपी में सहकारिता बँक में मुलायम परिवार का वर्चस्व खत्म; भाजपाने दे दी पट़खनी

उत्तर प्रदेश में १९९१ से अब तक सहकारिता के क्षेत्र में समाजवादी पार्टी और मुलायम सिह यादव परिवार का वर्चस्व रहा. भाजपाने बडी़ जीत दर्ज कर उसे खत्म किया है.


वृत्तसंस्था

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में सहकरिता क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव परिवार के वर्चस्व को भाजपाने तग़डा झटका दिया है. भाजपा के लिए यह जश्न का मौका है क्योंकि पार्टी और उसके समर्थित उम्मीदवारों ने उत्तर प्रदेश सहकारी भूमि विकास बैंकों के चुनावों में ३११ में से २८१ सीटें जीत कर मुलायम परिवार का बँकपर जमा राजनैतिक वर्चस्व खत्म किया हैं. इसके लिए मंगलवार को मतदान हुआ था. विपक्ष में मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी ने भी कुछ सीटें जीती है. इन चुनावों के लिए चुनाव आयुक्त पी. के. मोहंती ने कहा कि शिकायतों के चलते ११ जगहों पर चुनाव रद्द किए गए थे.

इस ‘ऐतिहासिक जीत’ को लेकर बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि विपक्षी उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने की ही हिम्मत नहीं की. वहीं विपक्ष ने कहा कि कि राज्य की मशीनरी ने चुनावों को हाइजैक कर लिया था.

कांग्रेस अमेठी के जगदीशपुर में ही जीत

कांग्रेस गांधी परिवार की परंपरागत सीट अमेठी के जगदीशपुर में ही जीत दर्ज करा सकी, जहाँ राहुल गांधी २०१९ के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी से हार गए थे. विपक्षी दलों द्वारा जीती गई अन्य प्रतिष्ठित सीटों में वाराणसी, बलिया, गाजीपूर और इटावा थीं.

मुलायम परिवार को झटका

२००५ से तीन बार बँक के अध्यक्ष रह चुके प्रगतिवादी समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) के अध्यक्ष और मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव ने कहा की भाजपा सरकार ने नियमों में बदलाव किया जिसने उन्हें चुनाव लड़ने में अयोग्य घोषित कर दिया. उन्होंने कहा, “अध्यक्ष पद के लिए दो बार से ज्यादा चुनाव लड़ना अब वर्जित है, जो कि अलोकतांत्रिक है.”

बता दें कि १९९१ से अब तक सहकारिता के क्षेत्र में समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव परिवार का वर्चस्व रहा है. यहां तक की मायावती के दौर में भी सहकारी ग्रामीण विकास बँक पर इसी परिवार का दबदबा रहा. लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपाने मुलायम परिवार तगडा़ झटका दिया है. मायावती नही कर सकी वह भाजपने कर दिखाया है.

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