मोदी की इस योजना ने 6 हफ्ते में बेरोजगारी पर की ‘सर्जीकल स्ट्राइक’


विशेष संवाददाता

नई दिल्ली : कोरोना संकट के दौरैन दुनिया के तमाम आर्थिक महाशक्तियां अपने अस्तितिव को बचाए रखने के लिए जूझ रही हैं तो वहीं भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में एक नई क्रांति गतिमान हो रही है। पीएम मोदी ने 6 हफ्ते पहले ही गरीब कल्याण रोजगार अभियान का ऐलान किया था, लेकिन इतने कम समय में इस योजना ने अपने गांव लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए 17 करोड़ श्रमिक दिनों के बराबर रोजगार पैदा कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की दूरदर्शिता की वजह से आज गरीब कल्याण रोजगार अभियान से बिहार, झारखंड, मध्य-प्रदेश, ओड़िशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 116 जिलों घर लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार के अवसर मिले हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक इस अभियान में अब तक जनता को 17 करोड़ श्रमिक-दिन के बराबर रोजगार के अवसर और इसकी एवज में 13,240 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 50, 000 करोड़ की राशि आवंटित की है। यही नहीं केंद्र सरकार के 12 मंत्रालय मिलकर इस अभियान को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक अब सरकार का ध्यान गांव लौटे प्रवासी मजदूरों को स्थायी रोजगार देकर उन्हें गांव में ही रोकने और जीवन यापन के अवसर देने की तैयारी पर है। सरकार ने बड़े स्तर पर गांवों में निर्माण कार्यों पर जोर दे दिया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए नए आवास, शौचालय, पशुओं के लिए आश्रय भवनों और जल संरक्षण के लिए अलग अलग ढांचों के निर्माण का काम शुरु कर दिया है।

अबतक 62,532 जल संरक्षण ढांचे, 1.74 लाख ग्रामीण आवास, 14,872 पशुओँ के लिए शेड्स, 8,963 कृषि उपयोगी तालाब, 2,222 सामुदायिक स्वच्छता परिसर, 5,909 विभिन्न निर्माण कार्य के साथ साथ 564 गांवों में इंटरनेट कनेक्शन दिए गए हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के मद्देनजर बीते 24 मार्च 2020 को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। इसके बाद देश के अलग अलग राज्यों से करीब 30 लाख प्रवासी मजदूरों का पलायन वापस उनके गृह राज्यों की तरफ देखने को मिला था । ये एक पीड़ादायक समय था जब टेलीविजन स्क्रीन्स पर हजारों मजदूरों को पैदल ही अपने गांव लौटते हुए देखा गया।

ये और बात है कि इस मुद्दे पर जमकर राजनीति भी हुई और राजनेताओं ने एक दूसरे पर प्रवासियों को पलायन करने पर मजबूर करने का आरोप भी लगाया था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस समस्या को चुनौती मानकर इसे अवसर में बदल दिया है।

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