पायलट की बग़ावत पर झुका गांधी परिवार, राहुल की ताजपोशी की तैयारी

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली : एक महीने से ज्यादा वक्त तक राजस्थान कांग्रेस के लिए मुसीबत बने और ‘निकम्मा’ कहलाए सचिन पायलट के विद्रोह के आगे कांग्रेस पार्टी के शाही परिवार को आखिरकार झुकना पड़ा है। यही नहीं पायलट और उनके समर्थक विधायकों को भी सम्मान जनक पद देकर स्थिती को काबू में करने की कोशिश हुई है। लेकिन ये कह देना कि राजस्थान की रार खत्म हो गई है तो ये जल्दबाजी होगी। साथ ही पूरे विवाद में गांधी परिवार के  देर से हस्तक्षेप पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सचिन पायलट के ताजा बयानों को देखकर साफ जाहिर होता है कि उनकी गहलोत से नाराजगी अभी दूर नहीं हुई है। पायलट ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में गहलोत के निकम्मे वाले बयान पर जवाब देते हुए कहा कि वे जाहिर तौर पर आहत हैं और उन्हें लगता है कि राजनीति में भाषा की मर्यादा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे गलत को गलत कहते रहेंगे। पायलट ने कहा कि पार्टी आलाकमान ने 3 सदस्यों की एक टीम बनाई है जो उनके समर्थक विधायकों की शिकायतों को सुनेगी और उन्हें सुलझाने की दिशा में काम करेगी।

राजधानी दिल्ली में सोमवार देर शाम से पायलट के साथ सुलह के कई फॉर्मूलों पर चर्चा चल रही थी। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका वाडरा की मौजूदगी में हुई बातचीत में सचिन ने अपना पक्ष रखा। सूत्रों के मुताबिक गांधी खानदान ने पायलट के योगदान को माना साथ ही उनके द्वारा किसी किस्म के आपत्तीजनक बयान न दिए जाने को भी स्वीकारा गया है। सूत्रों के मुताबिक तय हुआ है कि फिलहाल सचिन को पार्टी की केंद्रीय टीम में संगठन का बड़ा पद दिया जा सकता है। वहीं उनके समर्थक विधायकों को भी सम्मानजनक पद और जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। ऐसे में सवाल उठते हैं कि कांग्रेस के शाही खानदान को इस विवाद को सुलझाने में इतना समय क्यों लग गया?

दरअसल, कांग्रेस का अध्यक्ष पद रिक्त है और सोनिया गांधी ने कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर एक साल पूरा कर लिया हैं। जानकार मानते हैं भारत के निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देशों के उलट कांग्रेस पार्टी अब तक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम सामने नहीं ला सकी है। इससे कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर खतरा मंडरा सकता है। यही स्थिती बनी रही तो कांग्रेस का पंजे का निशान चुनाव आयोग छीन भी सकता है।

ऐसे में कांग्रेस के शाही खानदान पर भारी दबाव बन गया है। पार्टी में राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने के लिए आवाजें उठ रही है। राहुल को दोबरा अध्यक्ष बनाए जाने के लिए उठी तेज आवाजों में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी हैं, जाहिर है वे अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए राहुल से नजदीकी पाने की कोशिश में हैं।

वहीं राहुल गांधी भी हताश और परेशान हैं, क्योकि उन्होंने इस्तीफा देते हुए खुद कांग्रेस वर्किंग कमेटी से गांधी खानदान के बाहर से किसी नए नेता को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की थी। लिहाजा जानकारों की मानें तो राजस्थान के संकट को सुलझाने के लिए गांधी परिवार को पायलट का साथ आखिरकार देना ही पड़ा। जाहिर है कांग्रेस पार्टी इस मौके को अपने युवराज की दौबारा ताजपोशी के मौके के तौर पर देख रही है साथ ही राहुल को सर्वमान्य और सबको साथ लेकर चलने वाले नेता के तौर पर प्रस्तुत करने की कोशिश भी कर रही है।

कांग्रेस पार्टी ने इन कयासों को खुद सही साबित कर दिया है। पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने द्वीट कर राजस्थान के संकट को सुलझाने के लिए राहुल गांधी को श्रेय दिया है। सुर्जेवाला ने कहा कि राहुल गांधी की दूरदर्शिता और सबको साथ लेकर चलने के उनके संकल्प की वजह से ही राजस्थान संकट समाप्त हुआ है।

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