धौखे और फरे बसे संत बनने की कहानी है मदर टैरेसा

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली : भारत को ईसाई देश बनाने के लिए धर्मयुद्ध छेड़ने वाले वेटिकन से संत की उपाधी लेने वाली मदर टेरेसा की आज 110वीं जयंती है। हिन्दु मान्यताओँ को पुरातन कुपर्था बताने वाले तथाकथित भारतीय लिबरल आलोचकों ने कभी भी मदर टैरेसा के कुकृत्यों पर टिप्पणी नहीं की, ये हैरान करने वाली बात इसलिए नहीं है, क्योंकि आजादी के बाद देश की कमान कुछ ऐसे राजनीतिक परिवारों के हाथों में रही, जिनकी आस्था पाश्चात्य शक्तियों में ज्यादा रही है।
लेकिन ऐसा भी नहीं है कि दुनिया में मदर टैरेसा के ईसाइ एजेंडे को कोई भांप ही नहीं सका है।

ब्रिटेन में जन्मे और स्वतंत्र विचारों के लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस के मुताबिक “वो एक धार्मिक रुढ़िवादी, एक राजनीतिक गुप्तचर, एक कट्टर उपदेशक और दुनिया भर की ईसाई सांप्रदायिक्ता वाली ताक़तों की साथी थीं।”

मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी के प्रचार पुस्तिका पर बात करते हुए नन की आलोचना में हिचेंस इसे ‘दु:ख का संप्रदाय’ कहते हैं। वो आरोप लगाते हैं कि मदर टेरेसा ने गोद लिए हुए अपने शहर को नरक की तरह पेश किया और तानाशाहों और अधिनायकों से दोस्ती की। हिचेंस ने मदर टेरेसा को संदेह में खड़ा करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री ‘हेल्स एंजेल’ भी बनाई है।

लंदन स्थित भारतीय मूल के  डॉक्टर अरूप चटर्जी ने साल 2003 में मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी से जुड़े 100 लोगों का इंटरव्यू करने के बाद, मदर टेरेसा की तीखी आलोचना करते हुए एक लेख प्रकाशित किया था। उस लेख में उनके मुताबिक़, उनके बनवाए आश्रमों में बाक़ी चीज़ों के अलावा गंदगी, सीरिंज में एक ही सूई का बार-बार इस्तेमाल और देखभाल की घटिया व्यवस्था होती है।

मदर टेरेसा की आलोचना करने वाले कुछ और भी लोग हैं।

अमेरिका के मियामी शहर में रहने वाले  हेमली गोंदालेथ ने साल 2008 में कोलकाता में ग़रीबों के लिए बनवाए गए टेरेसा के एक आश्रय घर में दो महीने तक काम किया था। उनके मुताबिक़, “मुझे यह देखकर हैरत हुई कि चैरिटी किस भयानक लापरवारी के साथ काम करता है। यह लोगों के मन में चैरिटी के काम को लेकर जो विचार था, उसके ठीक विपरीत था”।

गोंदालेथ ने एक ब्रिटिश पत्रकार से कहा था कि, लोगों की देखभाल की ठोस योजना, उपकरणों को आधुनिक बनाना और मदद के लिए हज़ारों चीज़ों से कोसों दूर, मदर टेरेसा ग़रीबों की दोस्त नहीं, बल्कि ग़रीबी को बढ़ावा देने वाली थीं”।

1950 में मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी की स्थापना के बाद से ही लगातार मदर टेरेसा सवालों के घेरे में रही हैं। अक्सर टेरेसा की दुनिया के तानाशाहों और माफिया घरानओँ से ताल्लुक की खबरे सुर्खियां बनती रही हैं।

1971-86 के बीच हैती पर क्रूर शासन करने वाले दुवैलियर के साथ टेरेसा के अच्छे संबंध थे।

1981 में अपनी यात्रा के दौरान, टैरेसा ने उसके शासन को ‘गरीबों का दोस्त’ बताया, वही शासन जिसके शासकों ने 1986 के विद्रोह के बाद लाखों डॉलर के लिए हैतियों को लूट लिया था।

इतना ही नहीं, उसने कम्युनिस्ट तानाशाह एनवर होक्सा की कब्र पर माल्यार्पण भी किया, जिसने अपने मूल देश अल्बानिया में हिंसक रूप से लोगों का दमन किया था।

वहीं, 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी को मदर टैरेसा ने न सिर्फ अपना समर्थन दिया था बल्कि इमरजेंसी को अच्छा शासन करार देते हुए कहा था, कि ‘लोग खुश हैं, ज्यादा रोजगार भी हैं। कोई हड़ताल नहीं है।”

मदर टेरेसा के कथित आध्यात्मिक सलाकार और जेसुइट पादरी डोनल्ड जे मग्वायर से जुड़े विवाद पर भी मदर टैरेसा की चुप्पी पर काफी सवाल उठे थे। मग्वायर ने 11 साल के एक लड़के का यौन शोषण लंबे वक्त तक किया था। अमेरिका में उसके खिलाफ यौन संबंधों के बारे में जब रिपोर्ट आई, तब मदर टेरेसा ने उन सभी आरोपों को झूठ बताया था।

मदर टेरेसा से जुड़ा एक और विवाद है जिसमें साफ तौर पर गलत ढंग से काला धन दान के रूप में लेने पर टेरेसा पर सवाल उठे हैं। अमेरिका में वित्तीय फंड के घोटालेबाज चार्ल्स केटिंग को दोषी ठहराया गया था। इस अपराधी ने कई निवेशकों के लिए बेकार के ‘जंक बॉन्ड’ खरीदे। उसने 80 के दशक में टेरेसा को एक बड़ी राशि दान की थी और बदले में टेरेसा ने उसकी सजा की सुनवाई के दौरान क्षमादान की अपील की थी।

ऐसा नहीं है कि मदर टैरेसा के साथ काम करने वालों ने उनके दोहरे मापदंडों पर सवाल नहीं उठाए हैं। मिशनरी ऑफ चैरेटी में सेवा करने आए कई स्वयंसेवकों जैसे मैरी लाउडन और सुसान शील्ड्स ने खुलेआम दान में मिलने वालि राशि को लेकर गड़बड़ करने का आरोप लगाया था। साथ ही उनकी संस्था के आश्रमों और क्लीनिको में सुविधा की कमी पर गंभीर सवाल उठाए थे।

भारत में मदर टेरेसा को न सिर्फ सत्ताधारी दलों का संरक्षण प्राप्त रहा है बल्कि चर्च का भी भरपूर सहयोग मिलता रहा है।चर्च की फंडिंग से संचालित मीडिया संस्थानों ने जमकर टेरेसा का महिमामंडन किया और उनके आश्रमों में होने वाली गड़बड़ियों पर पर्दा डाला। हैरान करने वाली बात  ये है कि कई राजनेताओँ के टेरेसा की संस्था के साथ गहरे सबंध रहे हैं। सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका वाडरा हों या फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, इन जैसै कई और राजनेता, अधिकारी हैं जो खुलकर टेरेसा की संस्था मिशनरी ऑफ चैरेटी का समर्थन और उसका प्रचार करते आए हैं।

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