चीन के साथ युद्ध ही होगा आखिरी उपाय!

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली : चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी और सरकार में आधिपत्य के लिए चल रहे राष्ट्रपति ज़ी जिनपिंग और पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन धड़ों के बीच आंतरिक खींचतान चरम पर पहुंच गई है। जिनपिंग ने जियांग गुट के सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रष्टाचार के नाम पर एक एक कर न सत्ता से दूर किया है बल्कि जेल में डाल कर अपने विरोधियों को चुनौती दी है।

लेकिन जिनपिंग के खिलाफ चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के भीतर विरोध कम नहीं हो रहा है। आलम ये है कि चीन के प्रधानमंत्री ली किचियांग भी खुलकर जिनपिंग की नीतियों के खिलाफ बयान देते नजर आ रहे हैं।  ऐसे में जिनपिंग चीन के भीतरी घमासान से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भारत के साथ गतिरोध को खत्म नहीं करना चाहते हैं।

वहीं, भारत सरकार न भी चीन पर दबाव बढ़ा दिया है। चीफऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने शनिवार को कहा कि अगर चीन से चल रही बातचीत फेल हुई तो भारत के पास सैन्य-विकल्प का रास्ता खुला हुआ है, क्योंकि चीन पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर विवादित इलाकों में घुसपैठ करने के बाद बातचीत के बाद भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।

जनरल रावत ने ये बयान शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद दिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, अजीत डोवाल और सीडीएस जनरल रावत के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में चीन के साथ चल रही बातचीत को लेकर चर्चा की गई साथ ही चीन के आतरिक हालात की भी समीक्षा की गई। चीन में ज़ी जिंनपिंग के खिलाफ बढ़ते आक्रोश पर भी चर्चा की गई। ऐसे में चीन के साथ बातचीत विफल रहती है तो सैन्य कार्रवाई को लेकर सहमती भी बनाई गई है।

जानकारों की मानें तो चीनी सेना वहां की सत्ताधारी कम्यूनिस्ट पार्टी का अंग है और इसलिए चीनी सैनिक चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं। ऐसे में कम्यूनिस्ट पार्टी में मचे घमासान का असर वहां की सेना में भी देखने को मिल सकता है। चीन पर नजर रखे वाले कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जिनपिंग अगर नरमी नहीं दिखाते हैं या अपने पद को नहीं छोड़ते हैं तो आने वाले दिनों में चीन में गृह युद्ध की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी में नेतृत्व को लेकर विवाद ज़ी जिनपिंग के खुद को आजीवन राष्ट्रपति बनाए रखने की घोषणा से हुआ है। यही नहीं जिनपिंग ने सेना और पार्टी की भी कमान सीधे अपने हाथों में ले ली है। जानकारों के मुताबिक 1983 में चीन के 4थें संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति का कार्यकाल 10 साल का होना चाहिए और पार्टी महासचिव के साथ साथ सेना का सर्वोच्च कमांडर पद पर अलग अलग नेताओँ की नियुक्ती होनी चाहिए। लिहाजा वर्तमान में चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के नेताओं में जिनपिंग को लेकर गहरा असंतोष है।

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