कॉंग्रेस,एनसीपी के चक्रव्यूह से नहीं निकलसकेगी ठाकरे सरकार


विशेष प्रतिनिधी 

नई दिल्ली : फिल्मस्टार सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच को लेकर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार सवालों के घेरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुशांत मामले की जांच सीबीआई को सौंपकर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को करारा झटका दिया है। जानकार मानते हैं कि एनसीपी और कांग्रेस के मंत्रियों ने इस मामले में सरकार का पक्ष कमजोर तरीके से रखा जिसका खामियाजा उद्धव ठाकरे को उठाना पड़ रहा है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के लिए चौंकाने वाली घटना थी। लेकिन इसके साथ ही उद्धव ठाकरे के लिए बतौर मुख्यमंत्री ये एक अवसर भी था जहां वे अपने नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित कर सकते थे। ये और बात है कि इसमें वे पूरी तरह विफल ही नहीं हुए बल्कि एक कमजोर मुख्यमंत्री के रूप में उनकी छवि भी स्थापित हो गई।

राजनीतिक विश्लेशक मानते हैं कि कांग्रेस और एनसीपी ने दबे और बेमने ढंग से इस मामले में ठाकरे परिवार का बचाव किया है। सुशांत की मौत के डेढ़ महीने बाद ठाकरे परिवार के चश्मे चिराग आदित्य ठाकरे को खुद अपनी सफाई पेश करनी पड़ी। आदित्य ने ट्विटर का सहारा लेकर सुशांत की मौत से खुद का नाम जोड़े जाने को कोरी राजनीति करार दिया था। आदित्य ठाकरे के मुताबिक सुशांत की मौत से उनका जरा भी संबंध नहीं है लेकिन इसे उनके और उनके परिवार और पार्टी से जोड़कर बताया जा रहा है, जोकि कोरी सियासत है।

लेकिन इससे पहले ये भी गौर करने वाली बात है कि एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में उपमुखमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ ने गृह मंत्री अनिल देशमुख से मुलाकात के बाद सुशांत की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। जानकार पार्थ पवार के इस कदम को उद्धव सरकार की गिरती हुई साख के तौर पर देखते हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस कई मौकों पर ठाकरे सरकार पर दबाव बनाते नजर आए हैं। फड़नवीस ने सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत पर सवाल उठाए थे और उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की है। बीजेपी कहती आई है कि इस मामले में बेगुनाह लोगों से पूछताछ की जा रही है, जबकि संदिग्धों की अनदेखी की जा रही है।

महाराष्ट्र सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक शिवसेना के लिए अब महाराष्ट्र में सरकार को मजबूती से चला पाना मुश्किल होता जा रहा है। जहां कांग्रेसी खेमें में पहले से ही उथल पुथल मची हुई है, वहीं एनसीपी का खेमा भी शिवसेना के साथ बने रहने में अपनी भलाई नहीं मान रहा है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना पर लगातार दबाव बनाते आ रहे हैं और सुशांत सिंह राजपूत मामले में हुई फजीहत के बाद तो ठाकरे परिवार जैसे पूरी तरह से इन घटक दलों के चक्रव्यूह में फंस गया है।

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