उत्तराखंड सहित देश में पत्रकारों के दमन पर राष्ट्रपति से दखल की मांग

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली : नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया और दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने उत्तराखंड के साथ साथ देशभर में पत्रकारों की हत्या और उन पर फर्जी मुकदमे लगाकर जेल में भेजने के मामलों के खिलाफ संसद भवन के समीप प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पत्रकारों ने राष्ट्रपति से इन मामलों में देने की मांग की और पत्रकारों के खिलाफ सरकारी दमन को रोकने की अपील की।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक खामियों को उजागर करने वाले पत्रकारों पर राज्य की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने राजद्रोह के मामले दर्ज कर उन्हें जेल भेजने का शर्मनाक काम किया गया है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से उत्तराखंड सरकार के पत्रकारों पर दमनकारी रवैये के खिलाफ हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया है।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से जुड़े एनयूजे-आई के अध्यक्ष रास बिहारी की अगुवाई में निकाले गए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को दिए गए ज्ञापन में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग की गई है। 30 अगस्त को पूरे देश में पत्रकारों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करने के खिलाफ ऑनलाइन धरना दिया जाएगा।

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश थपलियाल ने कहा कि उत्तराखंड में पत्रकारों का सरकार द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मीडिया की आवाज दबाने में लगे हुए हैं। राज्य के वरिष्ठ पत्रकार और निजी न्यूज़ चैनल के मुख्य संपादक श्री उमेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा, एसपी सेमवाल व अन्य लोगों के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर गैंगस्टर एक्ट लगा दिया।

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के महासचिव के पी मलिक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बदमाशों की गोलियों से मारे गए तीन पत्रकारों शलभमणि तिवारी, विक्रम जोशी और रतन सिंह ने पुलिस से हत्या होने की आशंका के कारण सुरक्षा मांगी थी। तीनों की मौत उत्तर प्रदेश में खराब कानून-व्यवस्था के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि मीडिया पर बढ़ते हमलों के मद्देनजर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की जरूरत है।

राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि पत्रकारों को गलत तरीके से जेल भेजने वाली उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार पर भरोसा नहीं है। राष्ट्रपति से इन मामलों की अन्य राज्य की पुलिस से जांच कराने का अनुरोध किया गया है। संगठनों की तरफ से 30 अगस्त को देश के सबसे बड़े ऑनलाइन धरना में भाग लेने की अपील की गई है।

    Leave Your Comment

    Your email address will not be published.*