उत्तराखंड बीजेपी में असंतोष घहराया, मुख्यमंत्री के व्यवहार से असंतुष्ट विधायकों को केंद्र से आखिरी आस


विशेष संवाददाता

देहरादून : उत्तराखंड में बीजेपी विधायकों का सब्र अब टूटता जा रहा है। पार्टी के आधे से ज्यादा विधायकों की नाराजगी सीधे राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सुस्त तौर तरीकों को लेकर है। इन विधायकों का कहना है कि ना तो मुख्यमंत्री उनसे विकास कार्यों को लेकर सलाह मशविरा करते हैं और ना ही उनके क्षेत्रों में व्याप्त समस्याओं को दूर करने का कोई प्रयास ही करते हैं। आलम ये है कि सरकरी मशीनरी सरकार पर हावी हो गई है। नतीजतन विधायकों को स्थिती को अपने हाथों में लेकर केंद्रीय नेतृत्व से दखल की मांग करनी पड़ी है।

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के करीब करीब 02 दर्जन से ज्यादा विधायकों ने पिछले दिनों देहरादून में अलग-अलग कई दौर की बैठकें कर मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चेबंदी शुरु कर दी है। नाराज विधायकों में से कई ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुख्यमंत्री का रवैया बेहद हतोत्साहित करने वाला है। इन विधायकों के मुताबिक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विधायकों की कम और अपने चंद खास अधिकारियों की ज्यादा सुनते हैं। इनका कहना है कि कई बार मुख्यमंत्री से काम न करने वाले अधिकारियों और उनके भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत भी की गई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला है। बल्कि विधायकों का यहां तक कहना था कि मुख्यमंत्री के स्तर से कोई कार्रवाई न होने से अधिकारियों की नाफर्मानी कहीं गुणा ज्यादा बढ़ गई है।

ऐसा नहीं है कि बीजेपी के विधायकों ने अपनी नाराजगी अबतक सार्वजनिक नहीं की है। पिछले दिनों पार्टी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चूफाल ने मीडिया की पूछताछ पर कहा कि पार्टी विधायकों को बैठक कर राज्य में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा का पूरा अधिकार है। ऐसी ही एक बैठक विधायक विनोद कण्डारी के विधायक निवास फ्लैट में हुई थी, जहां विधायकों ने आगे की रणनीति तैयार की है।

वहीं सूत्रों के मुताबिक चुफाल पहले ही दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नढ्ढा से मुलाकात कर उन्हें राज्य के हालातों की जानकारी दे चुके हैं। जबकि लोहाघाट से वरिष्ठ विधायक पूरण सिंह फरतियाल ने भी दिल्ली में सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू से मुलाकात की है।

इधर, केंद्र सरकार में एक कद्दावर केंद्रीय मंत्री भी नाराज विधायकों के संपर्क में है। जबकि कई सांसदों ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर राज्य के हालातों से अवगत कराया है। जानकारी के मुताबिक सभी नेताओँ ने केंद्रीय नेतृत्व को बता दिया है कि वर्तमान नेतृत्व के साथ 2022 के विधानसभा चुनाव में जाने से पार्टी दहाई का आंकड़ा भी नहीं हासिल करेगी।

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री के संकटमोचक कहे जाने वाले राज्य मंत्री धन सिंह रावत की अगुवाई में विधायक महेंद्र भट्ट और पुश्कर सिंह धामी ने इन नाराज विधायको से संपर्क कर बातचीत करने की कोशिश की गई थी, लेकिन नाराज विधायकों की समस्याओं को लेकर ये नेता कोई ठोस आश्वासन नहीं दे पाए हैं। सूत्रों ने बताया है कि आने वाले दिनों में नाराज विधायकों का ये दल हल्द्वानी में एक बड़ी बैठक कर सकता है। इस बैठक में कुछ और विधायकों के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

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