बिहार चुनाव-देश की राजनीति बदल सकते हैं चुनावी नतीजे


बिहार में नीतीश कुमार अगर सत्ता बचाने में कामयाब हुए तो जाहिर तौर पर बंगाल में बीजेपी के हौसले सातवें समान पर होंगे। ऐसे में बिहार चुनाव के नतीजों पर चुनावी विश्लेषकों की नजरें तो टिकी हैं ही साथ ही देशभर के राजनीतिक दल भी सांसे थाम कर नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।bihar election news


बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 सीटों पर आज वोटिंग जारी है। राजनीतिक दृष्टिकोण से ये चरण बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि लालू के युवराज तेजस्वी और तेजप्रताप यादव की किस्मत का फैसला भी इसी चरण में होना है। वहीं तीसरे चरण का भी शंखनाद हो रहा है।bihar election news

पीएम नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी आज तीसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। पीएम मोदी और राहुल गांधी की आज दो-दो रैलियाँ हैं। आरजेडी के नेतृत्व में विपक्ष जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश में है तो वहीं एनडीए की एकता भी सवालों के घेरे में है।bihar election news

2020 में हो रहे बिहार चुनाव के नतीजों का दूरगामी असर देखने को मिल सकता है। एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच हो रहे सीधे मुकाबले से देश की भावी राजनीति को भी दिशा मिल सकती है। चुनाव के नतीजे न सिर्फ बिहार में सरकार गठन तक सीमित रहेंगे बल्कि ये राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालेंगे। बिहार में महागठबंधन के रूप में विपक्षी दल सियासी प्रयोग कर रहे हैं। लिहाजा महागठबंधन की जीत होती है तो यही फ़ॉर्मूला विपक्षी दल पूरे देश में अपना सकते हैं।bihar election news

ऐसे में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए के भविष्य के लिए भी ये चुनाव बेहद अहम हैं। एनडीए पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हो रहा है। शिवसेना और अकाली दल एनडीए को अलविदा कह चुके हैं। वहीं चिराग पासवान के नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी ने भी एनडीए से बाहर जाकर बिहार चुनाव में ताल ठोंकी है। ऐसे में बिहार चुनाव में एनडीए की हार होती है तो जेडीयू भी एनडीए से किनारा कर सकती है। जो सीधे सीधे बीजेपी की सियासी महत्वाकांक्षा पर भी असर डालेगा।

बिहार चुनाव के बाद देश के एक और बड़े और महत्वपूर्ण राज्य बंगाल में भी चुनाव की तैयारी शुरु हो जाएगी। लिहाजा बीजेपी के लिए बंगाल के चुनावी अखाड़े में उतरने से पहले बिहार में जीत हासिल करना अहम माना जा रहा है। लिहाजा बिहार के नतीजे सत्ता परिवर्तन करते हैं तो बंगाल का चुनावी समीकरण भी प्रभावित हो सकता है।

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बीजेपी के खिलाफ सत्ताधारी तृणामूल कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन कर सकती है। माना जा रहा है कि बिहार के नतीजे महागठबधंन के लिए सकारात्मक रहते हैं तो सीपीएम के नेतृत्व में सभी वामदल बीजेपी के खिलाफ मोर्चे बंदी के लिए टीएमसी के भी साथ आ सकते हैं। लेकिन बिहार में नीतीश कुमार अगर सत्ता बचाने में कामयाब हुए तो जाहिर तौर पर बंगाल में बीजेपी के हौसले सातवें समान पर होंगे। ऐसे में बिहार चुनाव के नतीजों पर चुनावी विश्लेषकों की नजरें तो टिकी हैं ही साथ ही देशभर के राजनीतिक दल भी सांसे थाम कर नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

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